ईरान, इराक, सीरिया, फिलिस्टीसउदी अरब समेत पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से हवाई यातायात पर बुरा असर पड़ा है. इस संघर्ष की वजह से भारत से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों की संख्या में 9 प्रतिशत की गिरावट हुई. यह गिरावट चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ही हुई है. यह गिरावट पूरी तरह से भारतीय एयरलाइंस की वजह से हुई. इंटरनेशनल पैसेंसर ट्रैवल में भारतीय एयरलाइंस की हिस्सेदारी काफी कम हो गई. जबकि विदेशी एयरलाइंस को काफी प्रॉफिट हुई है. बाजार में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी है. विदेशी एयरलाइंस से पैसेंजर खूब ट्रैवल कर रहे हैं.
भारतीय एयरलाइंस के लिए यह मुश्किल हालात खासतौर यूएई और वेस्ट एशिया से आने-जाने वालों की वजह से हुआ है. भारतीय एयरलाइंस ने यहां आने-जाने वाली फ्लाइट्स में कटौती की है. इसकी खास वजह पाकिस्तान को माना जा रहा है. अप्रैल 2025 से किसी भी भारतीय एयरलाइंस के पाकिस्तान के ऊपर से जाने से रोक लगी हुई है. वेस्ट एशिया और यूएई जाने के लिए भारतीय एयरलाइंस को घूम कर जाना पड़ रहा है. ऐसे में खर्च ज्यादा हो रहा है. फ्यूल की दिक्कत हो रही है. दूसरा, मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और संघर्ष की वजह भारतीय एयरलाइंस जाने से मना किया. फ्लाइट्स कैंसिल की. विदेशी एयरलाइंस पर भी इसका असर पर पड़ा, लेकिन कम. क्योंकि वे पाकिस्तान का एयरस्पेस इस्तेमाल कर पा रहे थे. यहां हम आपको भारतीय एयरलाइंस के घाटे और विदेशी एयरलाइंस के मुनाफे का पूरा गणित बता रहे हैं. कैसे पाकिस्तान इसमें अहम भूमिका निभा रहा है. आइए जानते हैं.
DGCA के पैसेंजर ट्रैफिक डेटा में दिखा घाटा
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) के लेटेस्ट इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रैफ़िक डेटा के मुताबिक, अप्रैल-जून में भारत आने-जाने वाले कुल इंटरनेशनल पैसेंजर की संख्या सालाना आधार पर 9.1% घटकर 1.72 करोड़ रह गई. भारतीय एयरलाइंस के कुल इंटरनेशनल यात्रियों की संख्या 26.6% घटकर 64.2 लाख हो गई, जबकि विदेशी एयरलाइंस के पैसेंजर की कुल संख्या 6% बढ़कर 1.02 करोड़ से 1.08 करोड़ हो गई. नतीजतन, विदेशी ऑपरेटर्स का मार्केट शेयर 53.8% से बढ़कर 62.7% हो गया, जबकि भारतीय एयरलाइंस का शेयर 46.2% से घटकर 37.3% रह गया.
भारतीय एयरलाइंस कंपनियों के पिछड़ने का कारण
- पाकिस्तानी एयर स्पेस का बंद होना: अप्रैल 2025 के अंत से पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद करने के कारण भारतीय एयरलाइंस को लंबे मार्गों से उड़ान भरनी पड़ी और रिफ्यूलिंग के लिए अतिरिक्त स्टॉप्स लेने पड़े.
- लागत और परिचालन दबाव: फ्यूल की बढ़ती कीमतों और लंबे रूटों की वजह से भारतीय एयरलाइंस (खासतौर पर एयर इंडिया और इंडिगो) के लिए पश्चिम की ओर जाने वाली फ्लाइट्स को चलाना आर्थिक रूप से नुकसानदेह साबित हुआ. इसकी वजह से उन्हें कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं.
- विदेशी एयरलाइंस को प्रॉफिट: विदेशी फ्लाइट्स के पास पाकिस्तानी एयरस्पेस यूज करने की सुविधा है, जिससे उन्होंने पश्चिम एशिया में कर्टेल की गई फ्लाइट्स की बची हुई क्षमता को भारत आने-जाने वाले रूटों पर लगा दिया.
भारतीय एयरलाइंस का परफॉर्मेंस:
- इंडिगो: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में 15.4% की गिरावट दर्ज की गई. मार्केट शेयर घट कर 19.4% रह गया.
- एयर इंडिया : यात्रियों की संख्या में 27.2% की कमी आई और मार्केट शेयर घटकर 11.2% हुआ.
- एयर इंडिया एक्सप्रेसः पश्चिम एशिया केंद्रित नेटवर्क होने के कारण यात्री संख्या आधी रह गई (8.34 लाख).
- स्पाइसजेट: सबसे ज्यादा 56% की गिरावट दर्ज की गई.
- अकासा एयर: इकलौती भारतीय एयरलाइन रही जिसने अपने बढ़ती फ्लाइट्स और कम शुरुआती आधार की वजह से अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की. इसने अपना इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रैफिक सालाना आधार पर 26% बढ़ाकर 1.72 लाख कर लिया.
पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने का असर
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बिगड़ गए. पाकिस्तान ने 24 अप्रैल, 2025 को भारत के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया. शुरू में एक महीने के लिए बंद किए गए इस एयरस्पेस के कारण भारतीय विमानों और एयरलाइंस के पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने पर रोक लग गई. इसके जवाब में भारत ने एक हफ़्ते बाद पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया. तब से, दोनों देश एक-दूसरे की एयरलाइंस और विमानों के लिए एयरस्पेस बंद रखने का समय हर महीने बढ़ाते रहे हैं.
पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित लगभग 800 साप्ताहिक उड़ानों (आने और जाने वाली) पर बुरा असर पड़ा. ये उड़ानें ज़्यादातर उत्तर भारत और पश्चिम एशिया, काकेशस, यूरोप, यूके और पूर्वी उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों के बीच होती हैं. पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल न कर पाने के कारण इन्हें लंबे रास्ते लेने पड़ रहे हैं.
पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल न कर पाने की वजह से कुछ फ्लाइट सर्विस को बनाए रखना आर्थिक और ऑपरेशनल तौर पर मुश्किल हो गया था. फरवरी के आखिर में वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले ही, भारत की ये दो बड़ी एयरलाइंस दबाव में थीं. पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने के कारण उन्हें दिल्ली जैसे अपने मुख्य हब से पश्चिम की ओर जाने वाले कुछ रूट पर लंबे रास्ते लेने पड़े और यहां तक कि फ्यूल भरने के लिए बीच में रुकना भी पड़ा. कुछ रूट तो बंद भी करने पड़े.
विदेशी एयरलाइंस को मिला मौका
इससे विदेशी एयरलाइंस को मौका मिला, और वेस्ट एशिया के झगड़े ने इस मौके को और बेहतर बना दिया. युद्ध शुरू होने के बाद, यूरोप और भारत के पश्चिम में मौजूद दूसरे इलाकों की कुछ एयरलाइंस ने भारत आने-जाने वाली अपनी फ्लाइट्स बढ़ा दीं. उन्होंने उन विमानों का इस्तेमाल किया जो वेस्ट एशिया के लिए फ्लाइट्स कम होने की वजह से खाली हो गए थे.
इन विदेशी फ्लाइट्स को हुआ फायदा
भारत आने-जाने वाली विदेशी फ्लाइट्स में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, इनमें इथियोपियन एयरलाइंस, लुफ्थांसा, केएलएम, स्विस एयर, फिन एयर, लॉट पोलिश, फ्लाईनास, अज़रबैजान एयरलाइंस, उज़्बेकिस्तान एयरवेज और एयर अस्ताना शामिल हैं. अप्रैल-जून में भारत के पूर्व की ओर के क्षेत्रों की कई एयरलाइंस ने भी यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की. इनमें वियतनाम एयरलाइंस, कैथे पैसिफिक, सिंगापुर एयरलाइंस, जापान एयरलाइंस, ऑल निप्पॉन एयरवेज और वियतजेट एयर ग्रुप शामिल हैं.
सऊदी अरब की एयरलाइंस को फायदा
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सऊदी अरब एयरलाइंस, या सऊदीया, ने जून तिमाही में भारत आने-जाने वाली उड़ानों में 50% ज़्यादा यात्रियों को सेवा दी, जिससे यात्रियों की कुल संख्या 3.38 लाख हो गई. भारत में काम करने वाली सबसे बड़ी विदेशी एयरलाइन, एमिरेट्स ने भारत और दुबई के बीच उड़ानों में यात्रियों की संख्या में 7.3% की बढ़ोतरी देखी, जिससे यह संख्या 14.8 लाख हो गई. युद्ध के कारण दुबई पर असर पड़ने के बावजूद एमिरेट्स यात्रियों की संख्या बढ़ाने में कामयाब रही, क्योंकि अमीरात ने दूसरे देशों की एयरलाइंस के कामकाज पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. इससे एमिरेट्स को बढ़ी हुई मांग को पूरा करने का मौका मिला.