Last Updated:August 22, 2026, 10:52 IST
चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में कभी सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाली मानिकपुर की बॉक्साइट फैक्ट्री आज खंडहर में बदल चुकी है. 1980 के दशक में शुरू हुई यह फैक्ट्री बॉक्साइट खनन पर रोक लगने के बाद बंद हो गई, जिससे क्षेत्र में रोजगार का संकट गहरा गया है और युवाओं को पलायन करना पड़ रहा है. यह फैक्ट्री अपने समय में पाठा क्षेत्र के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र थी.
चित्रकूटः पाठा क्षेत्र को कभी रोजगार देने वाली मानिकपुर की बॉक्साइट फैक्ट्री आज बदहाली और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है. एक दौर था, जब इस फैक्ट्री की मशीनों की आवाज से मानिकपुर नगर और आसपास का इलाका गुलजार रहता था. पाठा के सैकड़ों परिवारों के लोगों को यहां रोजगार मिलता था और इसी कमाई से उनके घरों का चूल्हा जलता था. लेकिन समय बदला, फैक्ट्री बंद हुई और देखते ही देखते रोजगार का एक बड़ा जरिया पाठा क्षेत्र से खत्म हो गया है. आज इसी फैक्ट्री की इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं और रोजगार की तलाश में क्षेत्र के युवाओं को दूसरे जिलों व प्रदेशों की ओर पलायन करना पड़ रहा है.
पाठा के विकास के लिए था वरदान
आप को बता दे कि मानिकपुर नगर में स्थित यह बॉक्साइट फैक्ट्री 1980 के दशक में शुरू हुई थी. उस समय इसे पाठा क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता था,जंगलों से निकलने वाले बॉक्साइट को यहां लाकर मशीनों के जरिए पीसा जाता था. फैक्ट्री के चालू रहने से न सिर्फ सीधे तौर पर लोगों को नौकरी मिलती थी, बल्कि माल ढुलाई, मजदूरी और अन्य छोटे-बड़े कामों से भी स्थानीय लोगों की आमदनी होती थी. हालांकि जिस क्षेत्र से बॉक्साइट की आपूर्ति होती थी, वहां बाद में वन विभाग की ओर से खनन पर रोक लगा दी गई थी. जिसके बाद बॉक्साइट की उपलब्धता प्रभावित होने से फैक्ट्री का संचालन मुश्किल होता गया और आखिरकार यह बंद हो गई. फैक्ट्री बंद होने के साथ ही यहां काम करने वाले सैकड़ों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था.
फिर से शुरू कर रोक सकते हैं पलायन
वहीं स्थानीय निवासी ललित ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि फैक्ट्री के संचालन के समय पाठा क्षेत्र के लोगों को अपने घर के पास ही रोजगार मिल जाता था. लोगों को दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी, फैक्ट्री बंद होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के अवसर एक दम खत्म हो गए. आज स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में युवा नौकरी और मजदूरी के लिए दूसरे जिलों तथा प्रदेशों का रुख कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि मानिकपुर की इस बंद पड़ी फैक्ट्री को दोबारा शुरू किया जाए या यहां कोई नया उद्योग स्थापित किया जाए तो इसका सीधा लाभ पाठा क्षेत्र के लोगों को मिल सकता है. रोजगार मिलने से पलायन पर भी रोक लग सकती है.
रोजगार का था बड़ा केंद्र
वहीं चित्रकूट निवासी सत्य प्रकाश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह फैक्ट्री अपने समय में पाठा क्षेत्र के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र थी. बॉक्साइट के खनन पर रोक लगने के बाद फैक्ट्री धीरे-धीरे बंद हो गई और इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार भी छिन गया. पाठा क्षेत्र आज भी रोजगार और उद्योग के मामले में पिछड़ा हुआ है. अगर सरकार और जनप्रतिनिधि इस बंद फैक्ट्री की जगह कोई अन्य फैक्ट्री खुलवाने की पहल करे तो दोबारा मानिकपुर और पूरे पाठा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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Chitrakoot,Uttar Pradesh
First Published :
August 22, 2026, 10:52 IST